मोहिनी एकादशी पूजा विधि
मोहिनी एकादशी वैशाख माह की शुक्ल पक्ष की एकादशी को मनाई जाती है. इस दिन पुरुषोत्तम भगवान की पूजा की जाती है. भगवान की प्रतिमा को स्नान आदि कराकर सफेद वस्त्र पहनाए जाते हैं. फिर प्रतिमा को किसी ऊँचे स्थान पर रखकर धूप, दीप दिखाकर आरती की जाती है. आरती के बाद मीठे फलों का भोग लगाकर श्रद्धालिओं में बाँटा जाता है. उसके बाद ब्राह्मण को अपनी सामर्थ्यानुसार दान-दक्षिणा देनी चाहिए. रात में भजन कीर्तन कर प्रतिमा के पास ही सोना चाहिए. इस एकादशी के प्रभाव से निंदनीय कार्यों से छुटकारा मिल जाता है.मोहिनी एकादशी व्रत की कथा
अन्त में सब कुछ खतम होने पर वह धनहीन हो गया और चोरी करने लगा. पुलिस ने उसको पकड़कर जेल में बंद कर दिया. दण्ड की अवधि खतम होने पर उसे नगर से बाहर निकाल दिया गया. वह वन में रहने लगा और पशु-पक्षियों को मारकर खाने लगा. एक दिन उसके हाथ कुछ ना लगा और भूखा-प्यासा कौडिन्य मुनि के आश्रम पहुंचा और मुनि के समक्ष हाथ जोड़कर बोला – “हे! मुनिवर, मैं आपकी शरण में हूँ और प्रसिद्ध पातकी हूँ, कृपया आप मुझे कोई ऎसा उपाय बताएँ जिससे मेरा उद्धार हो.” इस पर मुनि बोले – “वैशाख माह की एकादशी का व्रत करो, अनन्त जन्मों के तुम्हारे सारे पाप नष्ट हो जाएंगे.”
मुनि की बात सुनकर कुमार ने मोहिनी
एकादशी का व्रत करना आरंभ किया और पापरहित होकर विष्णुलोक को चला गया. इस
व्रत के माहात्म्य को जो कोई भी सुनता या करता है उसको हजारों गोदान का फल
मिलता है तथा पुण्य फल पाता है.
सभी एकादशियों के नाम -
चैत्र: पापमोचनी एकादशी, कामदा एकादशी
वैशाख: वरुथिनी एकादशी, मोहिनी एकादशी
ज्येष्ठ: अपरा एकादशी, पाण्डव निर्जला एकादशी
आषाढ: योगिनी एकादशी, देवशयनी एकादशी
श्रावण: कामिका एकादशी, पुत्रदा / पवित्रा एकादशी
भाद्रपद: अजा एकादशी, पार्श्व एकादशी
अश्विन्: इंदिरा एकादशी, पापांकुशा एकादशी
कार्तिक: रमा एकादशी, देवोत्थान / प्रबोधिनी एकादशी
मार्गशीर्ष: उत्पन्ना एकादशी, मोक्षदा एकादशी
पौष: सफला एकादशी, पौष पुत्रदा / पवित्रा एकादशी
माघ: षटतिला एकादशी, जया / भैमी एकादशी
फाल्गुन: विजया एकादशी, आमलकी एकादशी
अधिक: पद्मिनी एकादशी, परमा एकादशी


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